लंदन। शंघाई, कराची, ढाका, निंगबो और ग्वांगझू जैसे शहर लगातार जमीन धंसने और समुद्र के बढ़ते जलस्तर की चपेट में हैं। हाल ही में एक रिसर्च में चेतावनी दी गई है कि समुद्र के किनारे बसे ये शहर अब सुरक्षित नहीं हैं। वैज्ञानिकों ने इसे एक ‘कॉम्बिनेशन खतरे’ कहा है, जो किसी परमाणु हमले से कम नहीं। दुनिया के कई बड़े और महत्वपूर्ण डेल्टा शहरों के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है। अगर इन शहरों ने अपनी सुरक्षा रणनीति नहीं बदली, तो यहां न्यू ऑरलियन्स जैसी तबाही हो सकती है, जैसा 2005 में हरिकेन कैटरीना ने दिखाया था। ताजा अध्ययन में बताया गया है कि शंघाई जैसे शहर सिर्फ ऊंची दीवारों और बांधों के भरोसे नहीं रह सकते। क्लाइमेट चेंज के चलते समुद्री तूफान और ज्वार के स्तर में वृद्धि ने खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है। बड़े तूफान के समय यह दीवारें ताश के पत्तों की तरह ढह सकती हैं। इसके बाद आने वाली बाढ़ ‘पोल्डर फ्लड’ कहलाती है।


