नई दिल्ली। मानव शरीर एक निश्चित लय यानी रिदम के अनुसार कार्य करता है। जब यह लय संतुलित रहती है, तो बीमारियों का शरीर में प्रवेश कठिन हो जाता है। वैज्ञानिक इसे सर्कैडियन रिदम कहते हैं, जबकि आयुर्वेद में इसे दिनचर्या के रूप में जाना जाता है। आयुर्वेदिक दिनचर्या का पालन कर शरीर को न केवल मजबूत बनाया जा सकता है, बल्कि लंबे समय तक रोगमुक्त भी रखा जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में करना सबसे उत्तम माना गया है। सुबह जल्दी उठने से शरीर और मन दोनों में ताजगी बनी रहती है। शौच आदि के बाद तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है। इसके बाद त्वचा और बालों की सेहत के लिए नाभि में तेल की कुछ बूंदें डालना लाभकारी माना गया है। आंखों की देखभाल के लिए अंजन करने की परंपरा भी आयुर्वेद में बताई गई है।


