नई दिल्ली। हर व्यक्ति की शारीरिक बनावट और स्वभाव अलग होता है, जिसे तीन प्रमुख प्रकृतियों वात, पित्त और कफ के आधार पर समझा जाता है। इसलिए आयुर्वेद में वात को संतुलित रखना बेहद जरूरी बताया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, वात प्रकृति को संतुलित रखने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका सही खान-पान अपनाना है। ऐसे लोगों को बहुत ठंडी, सूखी या अत्यधिक तैलीय और मसालेदार चीजों से बचने की सलाह दी जाती है। आलू, कच्ची सब्जियां और ठंडी सलाद जैसी चीजें वात बढ़ा सकती हैं। इसके बजाय गर्म, हल्का भारी और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है। आहार में चावल, गेहूं, मूंग और उड़द जैसी दालों को शामिल करना लाभकारी हो सकता है। सब्जियों में गाजर, लौकी, कद्दू, शतावरी, टिंडा और भिंडी का सेवन वात संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है।


