नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि किसी बाहरी एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर नियुक्त कर्मचारी, सरकारी विभागों या निकायों के नियमित कर्मचारियों के बराबर समानता का दावा नहीं कर सकते। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने अपने फैसले में सरकारी नौकरियों को सार्वजनिक संपत्ति करार देते हुए कहा कि नियमित नियुक्तियां एक पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से की जाती हैं, जिसमें देश के सभी योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर प्राप्त होता है।


