जानें कैसे नकल को बिजनेस स्ट्रेटेजी में बदला
बीजिंग। चीन में ‘शानझाई’ शब्द का शाब्दिक अर्थ भले डकैतों के अड्डे से जुड़ा हो, लेकिन आधुनिक दौर में यह उन औद्योगिक इलाकों का प्रतीक बन गया जहां दुनियाभर के पायरेटेड या नकली उत्पाद तैयार होते रहे। भारत में जिसे आम बोलचाल में ‘नो गारंटी’ वाला सामान कहा जाता है। लेकिन इसी शानझाई संस्कृति ने चीन की औद्योगिक छलांग की नींव रखी। चीन की आर्थिक तरक्की लंबे समय तक दुनिया के लिए पहेली रही, पर इसकी एक बड़ी वजह उसकी ‘कॉपीकैट’ नीति रही है। जहां पश्चिमी देश मौलिकता (ऑरिजिनैलिटी) पर जोर देते हैं, वहीं चीन ने ‘फास्ट फॉलोअर’ रणनीति अपनाई। यानी अगर कोई आइडिया दुनिया के किसी बाजार में सफल है, तो उसे शून्य से विकसित करने के बजाय तेज़ी से अपनाकर, सुधार कर और कम कीमत में उतार दो। इससे जोखिम घटता है और बाजार में तेजी से पैठ बनती है।


