डॉ. हेडगेवार ने केवल राष्ट्रीय और संघ के कार्यक्रमों तक सीमित रखने का फैसला किया
नई दिल्ली,। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पथ संचलन में बजने वाला ‘घोष’ आज संघ की पहचान बन चुका है, लेकिन एक समय ऐसा था जब इसकी लोकप्रियता के चलते लोग इस निजी आयोजनों, यहाँ तक कि शादियों में भी किराये पर मांगने लगे थे। इसके बाद संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने इस पर सख्त रुख दिखाकर केवल राष्ट्रीय और संघ के कार्यक्रमों तक सीमित रखने का फैसला किया था।


