नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं, तालियां बजाने से भी शरीर में नई ऊर्जा का प्रवाह किया जा सकता है? आयुर्वेद में ताली बजाने को ‘कर वादन क्रिया’ कहा जाता है। हाथ और हथेलियों का संबंध शरीर के सभी अंगों से जुड़ा होता है और ये महत्वपूर्ण मर्म बिंदुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो कई शारीरिक समस्याओं और विकारों को कम करने में मदद करते हैं। सिर्फ 10 से 15 मिनट रोजाना ताली बजाने से शरीर में सक्रियता बढ़ती है और यह कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान कर सकता है। आयुर्वेद में एक्यूप्रेशर की प्राचीन पद्धति का इस्तेमाल सदियों से होता आया है। इसके माध्यम से ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है, बशर्ते सही मर्म बिंदुओं का पता हो। ताली बजाने की क्रिया भी इसी सिद्धांत पर आधारित है। इसे करने से दिल और रक्त धमनियों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी नियंत्रित रहता है। इससे रक्त संचार सुचारू रूप से होता है और हृदय रोगों तथा उच्च रक्तचाप का खतरा कम हो जाता है।


