पटना। बिहार की राजनीति में दशकों तक वंशवाद के प्रखर विरोधी रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने उनके राजनीतिक सिद्धांतों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अपने पूरे संसदीय जीवन में लालू यादव और कांग्रेस के परिवारवाद की आलोचना करने वाले नीतीश ने आखिरकार अपने बेटे निशांत कुमार को राजनीति के मैदान में उतारने की अनुमति दे दी है। शनिवार को निशांत ने जनता दल (यूनाइटेड) की सदस्यता ग्रहण कर ली जिसके बाद बिहार के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या नीतीश भी अब उसी राह पर चल पड़े हैं जिसका वे विरोध करते आए थे।

