एम्स्टर्डम। इंसान की किस्मत अगर अच्छी हो तो बुरा वक्त भी उपलब्धियों से परिपूर्ण हो जाता है। इसकी एक मिसाल हैं नीदरलैंड के हीमस्टेड शहर के मेयर फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क। मेयर फाल्गुन के जन्म से लेकर अभी तक की कहानी किसी फिल्मी स्टोरी से कम प्रतीत नहीं होती है।
दरअसल बताया जा रहा है कि वर्ष 1985 में नागपुर में जन्मे फाल्गुन को उनकी अविवाहित मां ने सिर्फ तीन दिन की उम्र में एक शेल्टर होम में छोड़ दिया था। आज 41 साल बाद वही बच्चा नीदरलैंड के शहर हीमस्टेड का मेयर है और अब उसने अपनी जन्मदात्री मां को तलाश करने की ठानी और भारत तक आ गया।
फाल्गुन का जन्म 10 फरवरी 1985 को हुआ था। उनकी मां उन्हें नागपुर स्थित ‘मातृ सेवा संघ’ नाम के शेल्टर होम में छोड़ गई थीं। यहां वे करीब एक महीने तक रहे। इसके बाद नीदरलैंड से भारत घूमने आए एक दंपत्ति ने उन्हें गोद ले लिया और अपने साथ ले गए। शेल्टर होम की एक नर्स ने बच्चे का नाम ‘फाल्गुन’ रखा था क्योंकि हिंदू कैलेंडर के अनुसार उसी महीने में उनका जन्म हुआ था।


