नई दिल्ली । हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है, जिनमें से एक प्रमुख प्रकृति पित्त होती है। आयुर्वेद के अनुसार पित्त प्रकृति वाले लोगों के शरीर में गर्मी अधिक रहती है, उन्हें जल्दी पसीना आता है। इतना ही नहीं, वे स्वभाव से तेज भी हो सकते हैं। ऐसे में उनके लिए संतुलित खानपान और सही जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि शरीर में बढ़ी हुई गर्मी को नियंत्रित किया जा सके और समग्र स्वास्थ्य बेहतर बना रहे। खानपान की बात करें तो पित्त प्रकृति वाले लोगों के लिए हल्के और ठंडक देने वाले अनाज फायदेमंद होते हैं। जौ, चावल और गेहूं जैसे अनाज न केवल पोषण देते हैं, बल्कि शरीर की आंतरिक गर्मी को भी कम करने में मदद करते हैं। वहीं उड़द दाल और कुलथी जैसी दालें, जो शरीर में गर्मी बढ़ा सकती हैं, उनसे दूरी बनाकर रखना बेहतर होता है। फलों का चयन भी इस प्रकृति के लिए काफी मायने रखता है।


