नई दिल्ली। अष्ट कुंभक ऐसा विशिष्ट योग अभ्यास है, जिसमें प्राणायाम की आठ उन्नत तकनीकों का समावेश होता है। इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथ हठ योग प्रदीपिका में मिलता है जहां इसे श्वसन क्षमता बढ़ाने और सूक्ष्म ऊर्जाओं को जागृत करने वाला अभ्यास बताया गया है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, योग को अक्सर केवल शारीरिक व्यायाम के रूप में देखा जाता है, लेकिन वास्तव में यह मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन का भी सशक्त माध्यम है। अष्ट कुंभक के अंतर्गत सूर्य भेदन, उज्जायी, सीतकारी, शीतली, भस्त्रिका, भ्रामरी, मूर्छा और प्लाविनी प्राणायाम शामिल हैं। ये सभी तकनीकें अलग-अलग तरीके से शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। सूर्य भेदन और भस्त्रिका शरीर में ऊर्जा का संचार करती हैं, वहीं शीतली और सीतकारी शरीर को शीतलता प्रदान करती हैं।


