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मुंह सूखना और लार कम बनना वात, पित्त और अग्नि का है असंतुलन

लाइफस्टाइल

नई दिल्ली। अक्सर लोग सोचते हैं कि पानी पीने से मुंह की सूखापन दूर हो जाएगा, लेकिन कई बार पर्याप्त पानी लेने के बावजूद भी लार की कमी के कारण मुंह सूखा ही रहता है। आयुर्वेद में इसे ‘मुख शोष’ कहा जाता है। लार न केवल भोजन को पचाने में मदद करती है, बल्कि दांतों की सुरक्षा, मुंह को गीला रखने और संक्रमण से बचाने का भी काम करती है। आयुर्वेद के अनुसार मुंह सूखना और लार कम बनना वात, पित्त और अग्नि के असंतुलन से जुड़ा है। सर्दियों में वात दोष प्राकृतिक रूप से बढ़ जाता है, जिससे शरीर में रूखापन बढ़ता है। वहीं, पित्त दोष शरीर में गर्मी और जलन को बढ़ाता है। इन दो दोषों और अग्नि के असंतुलन के कारण मुंह सूखने और लार कम बनने की समस्या होती है, जो पाचन और पूरे स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इस परेशानी से राहत पाने के लिए आयुर्वेद में कुछ आसान घरेलू उपाय सुझाए गए हैं।

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