नई दिल्ली। गर्भासन का नियमित अभ्यास करने से शरीर और मन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पडता है। गर्भासन एक उन्नत और विशेष मुद्रा के रूप में जाना जाता है, जो न केवल शारीरिक लचीलापन बढ़ाता है बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है। यह हठयोग का एक अहम आसन है, जिसमें शरीर भ्रूण की स्थिति जैसा दिखाई देता है, इसलिए इसे गर्भासन कहा जाता है। गर्भासन शब्द ‘गर्भ’ और ‘आसन’ से मिलकर बना है, जहां ‘गर्भ’ का अर्थ भ्रूण और ‘आसन’ का अर्थ मुद्रा होता है। इस आसन में शरीर उसी तरह सिकुड़ा और संतुलित दिखाई देता है, जैसे मां के गर्भ में शिशु होता है।


