नई दिल्ली। दुबई की तपती धूप हो या रूस की कड़ाके की ठंड मार्च के महीने में हजारों छात्र ठीक उसी तरह की बेचैनी और नर्वसनेस महसूस करते हैं जैसी दिल्ली या मुंबई के किसी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र को होती है। इस वैश्विक जुड़ाव की एकमात्र वजह है केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की परीक्षाएं। भारत का यह प्रतिष्ठित बोर्ड आज केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है बल्कि दुनिया के 25 से अधिक देशों में अपनी धाक जमा चुका है। खाड़ी देशों के आलीशान परिसरों से लेकर अफ्रीका के सुदूर क्षेत्रों तक सीबीएसई का नाम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का पर्याय बन गया है। आखिर हजारों मील दूर विदेशी जमीन पर बैठा भारतीय समुदाय अपने बच्चों को इसी बोर्ड से क्यों पढ़ाना चाहता है यह समझना बेहद दिलचस्प है।


