मुंबई। दिसंबर 2025 में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) रह सकता है, जो नवंबर के 18.4 लाख बीपीडी से काफी कम है। यह स्तर दिसंबर 2022 के बाद सबसे निचला होगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट संरचनात्मक नहीं, बल्कि अल्पकालिक बाधाओं के कारण हुई है। रूस के प्रमुख निर्यातक रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी कार्रवाई और यूरोपीय संघ के प्रतिबंध मुख्य कारण हैं। भारतीय रिफाइनरियां अभी भी गैर-प्रतिबंधित स्रोतों से रूसी तेल खरीद रही हैं, लेकिन प्रमुख रिफाइनरियों ने प्रतिबंधों के कारण खरीद घटा दी है। विश्लेषकों का कहना है कि जनवरी से नए बिचौलियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनःस्थापित होने से आयात धीरे-धीरे बढ़ सकता है। भारत अभी भी रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बना हुआ है।


