नई दिल्ली।बिहार विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल करने के बाद भाजपा मिशन बंगाल में जुट गई है। यहां बिहार के फार्मूले से पश्चिम बंगाल का सियासी समीकरण हल करने में जुटी भाजपा को जनता से क्या आनसर मिलेगा ये बाद में पता चलेगा। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया था कि अब पार्टी का लक्ष्य पश्चिम बंगाल में जीत हासिल करना है। लेकिन, क्या भाजपा बिहार के फॉर्मूले पर ही बंगाल में फतह हासिल कर सकती है? यह बड़ा सवाल है क्योंकि सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक हर तरीके से बंगाल, बिहार से अलग है। राज्य में भाजपा और टीएमसी के बीच सीधी टक्कर है। लेकिन, बीते तीन चुनावों यानी 2019 के लोकसभा, 2022 के विधानसभा और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने भाजपा को अपनी पुरानी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दी है। भाजपा समझ गई है कि बंगाल में सिर्फ हिंदू राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनावी फतह करना आसान नहीं है। क्योंकि इस राज्य में बिहार-उत्तर प्रदेश की तरह चुनाव में जाति बहुत अहम नहीं है। साथ ही इस राज्य में करीब 30 फीसदी मुस्लिम आबादी रहती है।


