अंबाला में ओलंपियन निशानेबाज सरबजोत सिंह की सफलता का असर युवाओं पर साफ दिखाई दे रहा है। पेरिस ओलंपिक में उनके प्रदर्शन के बाद शहर में निशानेबाजी सीखने वाले बच्चों और युवाओं की संख्या बढ़ी है। पहले जहां कई युवा कुश्ती को प्राथमिकता देते थे, वहीं अब शूटिंग को भी करियर के रूप में देख रहे हैं। अभिभावक बच्चों को प्रशिक्षण के लिए विभिन्न अकादमियों में भेज रहे हैं। सरबजोत के कोच अभिषेक राणा भी नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनका जोर तकनीक के साथ अनुशासन और एकाग्रता पर है। विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 10 वर्ष की उम्र के बाद बच्चे निशानेबाजी का अभ्यास शुरू कर सकते हैं।


