विदेशी दबाव और निवेशक आउटफ्लो के चलते आरबीआई का आर्थिक संतुलन चुनौतीपूर्ण
नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस समय ऐतिहासिक चुनौती का सामना कर रहा है। ईरान और इजराइल के बीच युद्ध, वैश्विक तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों के अचानक अरबों डॉलर की निकासी ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। रुपये की गिरावट रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी है, वहीं विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना भी अनिवार्य हो गया है। आम आदमी की जेब, उद्योग और सरकार—सब इस अस्थिरता से सीधे प्रभावित हैं। आरबीआई के सामने दो विकल्प हैं: या तो रुपये को स्थिर रखें, जिससे घरेलू नकदी और ब्याज दरों पर असर पड़ेगा, या विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा करें, जिससे रुपये में गिरावट आ सकती है।


