नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में वैश्विक व्यापार और कूटनीति को लेकर उनका रुख काफी आक्रामक रहा। उन्होंने कई देशों पर टैरिफ लगाने की चेतावनी देकर अपनी व्यापारिक शर्तें मनवाने की कोशिश की, लेकिन भारत ने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए किसी भी दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया।
इसके बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने अमेरिकी प्राथमिकताओं को बदल दिया। व्यापारिक विवादों की बजाय अमेरिका का ध्यान क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक साझेदारियों पर केंद्रित हो गया। इस दौरान भारत की भूमिका और महत्व पहले से अधिक बढ़कर सामने आया।
हाल के महीनों में ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की खुलकर सराहना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र, वैश्विक अर्थव्यवस्था और चीन के प्रभाव को संतुलित करने में भारत की अहम भूमिका को देखते हुए अमेरिका अब नई दिल्ली के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने पर विशेष जोर दे रहा है।


