तेहरान। ईरान में आर्थिक बदहाली और बेकाबू महंगाई के खिलाफ जनता का आक्रोश चरम पर है। पिछले 10 दिनों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन अब देश के 31 में से 27 प्रांतों तक फैल चुके हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हो रही हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 35 लोगों की जान जाने की खबर है, जिनमें प्रदर्शनकारी, बच्चे और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सुरक्षा बल बल प्रयोग कर रहे हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
प्रदर्शनों की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ईरान के 88 शहरों में 250 से अधिक स्थानों पर रैलियां, चक्का जाम और हड़तालें देखी गई हैं। राजधानी तेहरान सहित इस्फ़हान और बाबोल जैसे प्रमुख शहरों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। हिंसा को रोकने और प्रदर्शनकारियों के बीच समन्वय तोड़ने के लिए सरकार ने कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे जमीनी हालात की सटीक जानकारी मिलना मुश्किल हो गया है। अब तक 1,200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं। देश के लगभग 17 विश्वविद्यालयों में छात्रों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। ईरान में उपजे इस ताजा असंतोष की मुख्य जड़ जून में इजरायल के साथ हुए 12 दिवसीय युद्ध के बाद पैदा हुए विनाशकारी आर्थिक हालात हैं। युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की मार से ईरान की मुद्रा रियाल पूरी तरह धराशायी हो चुकी है। दिसंबर में इसकी कीमत गिरकर 14 लाख रियाल प्रति डॉलर तक पहुंच गई, जिससे देश में महंगाई और बेरोजगारी ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। जनता का आरोप है कि सरकार बुनियादी समस्याओं को सुलझाने के बजाय दमनकारी नीतियां अपना रही है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान की घेराबंदी शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या का सिलसिला नहीं थमा, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर होगा। ट्रंप की यह धमकी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में अमेरिकी सेना ने ईरान के सहयोगी देश वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया है। इस घटनाक्रम ने तेहरान की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि उसे डर है कि अमेरिका अब ईरान के आंतरिक मामलों में सीधा दखल दे सकता है। ईरान की वर्तमान स्थिति 2022 के हिजाब आंदोलन के बाद का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है, जो अब सत्ता के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।


