चीन, ब्राजील, सऊदी अरब और हांगकांग ने भी अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में हिस्सेदारी घटाई
नई दिल्ली। अक्टूबर 2025 तक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में निवेश लगभग 190 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले साल के मुकाबले 50.7 अरब डॉलर कम है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी और अन्य विकसित देशों में बढ़ते वित्तीय दबावों के कारण बॉन्ड यील्ड में वृद्धि हुई है, जिससे ट्रेजरी बॉन्ड में वैल्यूएशन लॉस का जोखिम बढ़ गया। इसी अवधि में आरबीआई ने अपने सोने के भंडार में बढ़ोतरी की है। अक्टूबर 2025 तक केंद्रीय बैंक के पास 880.18 मीट्रिक टन सोना था, जो पिछले साल 866.8 टन था। विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 13.6 फीसदी हो गई, जबकि पिछली बार यह 9.3 फीसदी थी। भारत ही नहीं, चीन, ब्राजील, सऊदी अरब और हांगकांग ने भी अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी घटाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक अनिश्चितताओं के बाद केंद्रीय बैंक डॉलर पर निर्भरता कम कर सुरक्षित एसेट जैसे सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं।


