नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि मैदा धीरे-धीरे आपके पाचन तंत्र और संपूर्ण सेहत के लिए खतरा बन सकता है? विशेषज्ञ और आयुर्वेद चिकित्सक इसे ‘साइलेंट क्राइसिस’ की संज्ञा देते हैं। दरअसल गेहूं से मैदा बनाने की प्रक्रिया में उसकी सबसे जरूरी परतें हटा दी जाती हैं। गेहूं की बाहरी परत और भ्रूण में ही फाइबर विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए बेहद जरूरी होते हैं। जब ये हिस्से निकाल दिए जाते हैं तो जो बचता है, वह केवल स्टार्च होता है यानी खाली कैलोरी। आयुर्वेद में ऐसे भोजन को ‘निःसत्व आहार’ कहा गया है जो शरीर को ऊर्जा तो देता है लेकिन पोषण नहीं। फाइबर की कमी के कारण मैदा पाचन तंत्र पर बुरा असर डालता है।


