उत्तराखंड में जंगलों में लगने वाली आग अब गंभीर रूप लेती जा रही है। बढ़ती गर्मी और सूखे मौसम के कारण आग उन बांज के जंगलों तक पहुंच गई है, जिन्हें राज्य की पर्यावरणीय व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। छह हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर पाए जाने वाले ये वन जलस्रोतों और नमी को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
स्थिति को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने अधिकारियों को आग पर नियंत्रण के लिए तेजी से कार्रवाई करने और कारणों की पड़ताल करने के निर्देश दिए हैं।
बांज के पेड़ वर्षा जल को संरक्षित कर पारंपरिक जलस्रोतों को जीवित रखने में मदद करते हैं। आमतौर पर इन जंगलों में नमी अधिक रहने से आग का खतरा कम होता है, लेकिन इस बार कई ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आग की घटनाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया तो जैव विविधता और जलस्रोतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।


