बगलें झांकने वालों को दी सख्त हिदायत
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पांच देशों के दौरे से लौटते ही शासन व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। एनडीए-3 सरकार के दो साल पूरे होने से ठीक पहले प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की एक बेहद अहम और लंबी बैठक हुई। करीब चार घंटे चली इस बैठक में सीधे तौर पर विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पेश किया गया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
इस उच्च स्तरीय बैठक में कैबिनेट सचिव और नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने मंत्रालयों के प्रदर्शन पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। मंत्रालयों की रैंकिंग तय करने के लिए मुख्य रूप से दो प्रमुख पैमानों को आधार बनाया गया—पहला, सरकारी फाइलों का निस्तारण कितनी तेजी से हो रहा है और दूसरा, आम जनता की शिकायतों (पब्लिक ग्रीवांस) को सुलझाने में मंत्रालय का रवैया कितना सक्रिय है।
इन्हीं मानकों के आधार पर सबसे बेहतर काम करने वाले टॉप-5 और सबसे सुस्त प्रदर्शन करने वाले बॉटम-5 मंत्रालयों की एक स्पष्ट सूची बैठक में सामने रखी गई। हालांकि, खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों के नामों का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन निचले पायदान पर रहने वाले मंत्रालयों को प्रधानमंत्री ने अपने कामकाज के तरीके में तुरंत सुधार लाने की सख्त हिदायत दी है। पीएम ने दो टूक कहा कि फैसले तेजी से लिए जाने चाहिए, उत्पादकता बढ़ाई जानी चाहिए और लालफीताशाही को पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए।
इस समीक्षा बैठक के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की अटकलें जोरों पर हैं। आगामी 9 जून को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे हो रहे हैं। इससे पहले सभी केंद्रीय मंत्रियों को दिल्ली में ही मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है। माना जा रहा है कि जिन मंत्रियों का परफॉरमेंस उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है, उन्हें हटाया जा सकता है या उनके विभाग बदले जा सकते हैं, जबकि अच्छा काम करने वाले चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। बैठक में कृषि, श्रम, सड़क परिवहन और ऊर्जा सहित कई प्रमुख मंत्रालयों के कार्यों की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने ईज ऑफ लिविंग पर फोकस करते हुए मंत्रियों और शीर्ष नौकरशाहों से कहा कि हर सुधार का अंतिम लक्ष्य आम नागरिक के जीवन को आसान बनाना होना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि विकसित भारत 2047 महज़ एक नारा नहीं, बल्कि देश के प्रति सरकार का अटूट संकल्प है।


