टैक्स में कटौती करने का सरकार पर दबाव
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमत का लगभग 35 से 50 प्रतिशत हिस्सा टैक्स के रूप में केंद्र और राज्य सरकारों के पास जाता है। केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी वसूलती है, जबकि राज्य सरकारें वैट और अन्य कर लगाती हैं।
तेल कंपनियों द्वारा हाल में कीमतों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद विपक्ष और उपभोक्ता संगठनों ने सरकार पर टैक्स कम करने का दबाव बढ़ा दिया है। जानकारों का कहना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें टैक्स में 30 प्रतिशत तक कटौती करें तो पेट्रोल-डीजल 8 से 15 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता हो सकता है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और आयात लागत बढ़ने से तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बना हुआ है। वहीं आम जनता महंगाई से राहत की उम्मीद लगाए बैठी है।


